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India gave the world the taste of brinjal | भारत ने दिया दुनिया को बैंगन का स्वाद: अरब के रास्ते यूरोप पहुंचा; डायबिटीज काबू में और दिल दुरुस्त रखे, कमजोर हड्डी वाले न खाएं

  • February 18, 2024

नई दिल्ली58 मिनट पहलेलेखक: मरजिया जाफर

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लंबा, मोटा, छोटा गोल-मटोल क्यूट सा दिखने वाला बैंगन आलू के खास संगी साथियो में से एक है। क्योंकि जब बैंगन की जुगबंदी आलू के साथ होती है तो दोनों का ही जायका बढ़ जाता है।

‘फुरसत का रविवार’ है, आज बात हो जाए बैंगन के ही किस्से कहानी, किस्मों और खूबियों पर। बैंगन से कई तरह की डिशेज़ बनाई जाती है। कहने में आता है छुट्टी का दिन और बैंगन की बात, ना बाबा ना…उदास न हो आज हमारे साथ बैंगन का स्वाद लेकर तो देखें।

बैंगन उत्तर और दक्षिण भारत में, बहुत पसंद किया जाता है। बैंगन की सब्जी, बैंगन का भरता, सांभर में बैंगन, बैंगन भाजा, बैंगन का चोखा और बैंगन के पकौड़े। इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

भारत की धरती पर पैदा हुआ बैंगन दुनिया को दे रहा स्वाद

बैंगन का इतिहास बहुत ही पुराना है। बैंगन की पैदावार भारतीय उपमहाद्वीप से शुरू हुई और बैंगन धीरे-धीरे चीन से यूरोप तक पहुंच गया।

पहले बैंगन को दवाई बनाने के लिए इस्तेमाल करते थे। भारतीय वनस्पति शास्त्र में इसके फायदे और इस्तेमाल का भी जिक्र है। बैंगन का इतिहास और उसकी खासियत हमारी संस्कृति का हिस्सा है।

इतिहास से जुड़ी एक कहानी है। साढ़े चार हजार साल पहले हरियाणा के गांव फरमाना में एक परिवार बैंगन खाने बैठा जो सरसों के तेल में बना हुआ था।

उसमें लहसुन, अदरक और हल्दी डाली गई थी। परिवार के सदस्यों ने बैंगन की सब्जी का लुत्फ जौ और बाजरा के बने पराठों के साथ लिया। ये भारत में बैंगन खाने का सबसे पुराना तरीका माना जाता है।

ये बात पुरावनस्पतिशास्त्री और पुरातत्वविद अरुणिमा कश्यप और स्टीव वेबर ने खाने के टूटे बर्तनों के अध्ययन के बाद कही है। ये बर्तन हरियाणा की घाघर घाटी में फरमाना गांव में खुदाई के दौरान मिले। फरमाना गांव में हुई खुदाई से पता चलता है कि बैंगन सबसे ज्यादा पुरानी खाई जाने वाली सब्जी है।

बैंगन की आज की असलियत

बैंगन की एक और बड़ी दिलचस्प कहानी है, पहले ये छोटा, गोल, पीला और हरे रंग का हुआ करता था। इस पर गुलाबी और सफेद धारियां होती थीं और स्वाद भी कड़वा होता था। जब इसका इस्तेमाल खाने में होने लगा तो लोगों ने इसकी बेहतर नस्ल की खोज की, जो कम कड़वी होती थी और रंग जामुनी था जो आज हम सबकी थाली में सजा मिलता है।

रंग-बिरंगे बैंगन

भारत के हर हिस्से में बैंगन की अपनी खास किस्म होती है और इसे बनाने का तरीका भी अलग-अलग है।

हैदराबाद में बघारे बैंगन बनते हैं तो उत्तर भारत में बैंगन का भर्ता। कश्मीर में खट्टे वांगुन, महाराष्ट्र में भरेली वांगी, गुजरात में रिंगना बटाटा का नू शाक, राजस्थान में बरवां बैंगन, तमिलनाडु में कातीरि काई वारुवल या कातीरि काई कोझुंबु, केरल में कातीरिका थियाल और पूर्वी भारत में बेगुन भाजा जैसी बैंगन की रेसिपी मशहूर है। अमेरिका में बैंगन को एगप्लांट कहते हैं जबकि यूरोपीय देशों में इसे ओबेजींस और ब्रिंजल कहते हैं।

रेसिपी के हिसाब से अलग-अलग बैंगन

रेसिपी के हिसाब से बैंगन उगाये जाते हैं। जामुनी और काले रंग के बड़े बैंगन भर्ते के लिए होते हैं। बंगाली मालडा बैंगन का इस्तेमाल भर्ता या बेगुन पोड़ा बनाने में होता है।

महाराष्ट्र में बैंगन की कई क़िस्में होती हैं। यहां जामुनी बैंगन बहुत पसंद किया जाता है जिसे दोवली ची वांगी कहते हैं।

इस पर गहरे हरे रंग की धारियां होती हैं। मिराज शहर का बड़ा सफेद बैंगन सेहत के लिए फायदेमंद होता है। मैंगलोर में बैंगन की उडुपी क़िस्म बहुत ही दिलचस्प है।

इसे ‘मट्टू गुल्ला’ कहते हैं। ये गोल और हरे रंग की धारियां लिए होता है। इसकी पैदावार उडड्पी के पास मट्टू गांव में होती है जिसे जीआई (GI) टैग मिला है। यहां बैंगन कई तरह खाते हैं। तलकर, भाप में पका कर या नॉर्मल सब्जी बनाकर खाते हैं।

बैंगन को घर घर पहुंचाने में चीन का अहम रोल

बैंगन ईरान, इराक़, पश्चिम एशिया और भूमध्यसागरीय देशों में बहुत मशहूर है। यह भूमध्यसागरीय खुराक का अहम हिस्सा है। पूरे पश्चिम एशिया में भर्ता बनाया जाता है जिसे ‘बाबा घानौश’ कहते हैं और यहां के लोग दावा करते हैं कि उन्होंने बैंगन की खोज की है।

बैंगन फ़्रांस, स्पेन, मिस्र और मोरक़्क़ो में भी ख़ूब पसंद किया जाता है। बैंगन को घर घर तक पहुंचाने में चीन की भी अहम भूमिका है। विश्व में बैंगन का 62% उत्पादन चीन में होता है जबकि भारत में इसका उत्पादन 25% होता है।

बैंगन में छिपा सेहत का खजाना; डायबिटीज काबू में और दिल दुरुस्त रखे

न्यूट्रीशन से भरपूर बैंगन में एंथोस्यानिन तत्व पाया जाता है जिसे नैसुनिन कहते हैं। ये एंटी ऑक्सीडेंट होता है जो शरीर की कोशिशकाओं को बचाता है। ये बैंगग दिमाग के लिए बेहतर विटामिन के और सी से भरपूर है। रोजाना खाने से दिल की बीमारियां और डायबिटीज़ कंट्रोल में रहती है। इसकी सबसे खास बात ये है किहर जगह और मौसम में उगाया जा सकता है।

बैंगन में विटामिन, फेनोलिक्स (कार्बोलिक एसिड) और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। इन खास तत्वों की मौजूदगी के की वजह से बैंगन स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों को दूर करने के लिए एक इस्तेमाल किया जाता है।

डायबिटीज है तो बैंगन जरूर खाएं इसमें मौजूद फेनोलिक्स (कार्बोलिक एसिड) टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को कम कर सकते हैं। फेनोलिक एंटीऑक्सीडेंट गुण ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस को कम कर हाई ब्लड शुगर को भी कम करते हैं। मगर सब्जी में आलू न डाले।

बैंगन में विटामिन-ए, विटामिन-सी के साथ बी-कैरोटीन और पॉलीफेनोलिक कंपाउंड हैं। इसके कारण बैंगन में शक्तिशाली कार्डियो प्रोटेक्टिव प्रभाव पाया जाता है। जो दिल की सेहत के लिए बेहतर है।

याददाश्त बढ़ाए

मानसिक स्वास्थ्य के लिए आयरन, जिंक, फोलेट और विटामिन ए, बी और सी फायदेमंद होते हैं, जो बैंगन में भी मौजूद हैं। बैंगन का इस्तेमाल दिमाग की कार्य क्षमता बढ़ाने में कारगर है।

डाइजेशन सुधारे

डाइजेशन को सुधारने में बैंगन के फायदे हैं। स्टीम कुकिंग से बना बैंगन डाइजेशन सही रहता है। पाचक रस भोजन को पचाने में अहम है। इसलिए, ऐसा कहा जा सकता है कि बैंगन का इस्तेमाल डाइजेशन सुधारने के लिए बेहतर है।

वेट लॉस में मदद करे

100 ग्राम बैंगन में 92 ग्राम पानी, हाई फाइबर, कम फैट कम कैलोरी होती है। जो पेट भरने के साथ-साथ मोटापे की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए बेहतर है।

कैंसर के जोखिम को कम करता है

बैंगन में एंथोसायनिन पाया जाता है जो कैंसर सेल्स के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकता है। इसलिए, ऐसा कहा जा सकता है कि बैंगन का उपयोग कैंसर की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए काफी हद तक फायदेमंद साबित हो सकता है।

खून की कमी दूर करे और बीमारियों से लड़ने की ताकत दे

बैंगन इम्यून पावर को बढ़ाने में मददगार है। इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए विटामिन ए-सी-डी-ई-बी-2-बी-6-बी-12, फोलिक एसिड आयरन, सेलेनियम और जिंक अहम होते हैं। जो इम्यूनिटी को बढ़ाने का काम करते हैं।

खून की कमी का कारण आयरन और फोलेट के साथ-साथ विटामिन बी-12 की कमी भी हो सकती है। बैंगन में फोलेट और आयरन दोनों पाए जाते हैं। बैंगन के औषधीय गुण एनीमिया के जोखिमों को कम करने में भी सहायक है।

नींद न आने की समस्या से बचाए

बैंगन में ऐसेटाइलकोलिन और डोपामाइन नाम के डाइटरी न्यूरोट्रांसमीटर पाए जाते हैं। यह दिमागी विकास के साथ चिंता और अनिद्रा की समस्या को हल करने में सहायक हैं।

जैन धर्म के लोग बैगन नहीं खाते

बैंगन एक ऐसी सब्ज़ी है जो ज्यादातर घरों में खाया जाता है। लेकिन जैन धर्म के लोग बैंगन में कीड़े होने की वजह से नहीं खाते। जैन धर्म हत्या के खिलाफ है। इसीलिए जैन धर्म में बैंगन खाने से परहेज है।

बैंगन खाने से एलर्जी, ये लोग बैंगन खाने से बचें

बैंगन को कुछ लोग खाना पसंद करते हैं और कुछ नहीं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बैंगन खाने में गुणकारी तो होता है, मगर इसके कुछ नुकसान भी हैं। बैंगन खाने से पहले इसकी जानकारी होना जरूरी है।

किडनी स्टोन का खतराः किडनी स्टोन की परेशानी से जूझ रहे हैं तो बैंगन से दूर रहें। बैंगन के बीज पथरी बनाने का काम करते हैं। इससे किडनी को नुकसान हो सकता है।

हड्डियों के लिए सही नहींः बैंगन में एक तत्व ओक्जेलेट पाया जाता है। जो हड्डियों की सेहत के लिए खतरनाक है। जिन लोगों की हड्डियां कमजोर हैं, उन्हें बैंगन खाने से बचना चाहिए।

पाइल्सः पाइल्स का शिकार है तो बैंगन न खाएं। इससे परेशानी और बढ़ सकती है।

आर्थराइटिस में नहीं खाएं बैंगनः आर्थराइटिस की समस्या में बैंगन खाने से बचें। इससे आर्थराइटिस की समस्या और अधिक गंभीर हो सकती है।

बताइए बैंगन के स्वाद का सफर कैसा रहा। अब आपको बैंगन में कुछ नया स्वाद जरूर मिला होगा।

ग्राफिक्स: सत्यम परिडा

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