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India Vs England Test; Akash Deep Interview On Team Selection | टीम इंडिया में सिलेक्ट हुए आकाश दीप की स्ट्रगल स्टोरी: बिहार के गांव में न मैदान था, न टर्फ; रेड बॉल भी नहीं देखी थी

  • February 10, 2024

कुछ ही क्षण पहलेलेखक: राजकिशोर

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इंग्लैंड के खिलाफ आखिरी 3 टेस्ट मैच के लिए शनिवार को भारतीय टीम का ऐलान कर दिया गया है। बिहार के रोहतास जिले के सासाराम के रहने वाले आकाश दीप नया चेहरा हैं। वे जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज, मुकेश कुमार के साथ टीम में हैं।

27 साल के आकाश दीप पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में चुने गए हैं। इससे पहले उन्हें साउथ अफ्रीका दौरे पर गई भारतीय वनडे टीम में चुना गया था, लेकिन वे डेब्यू नहीं कर सके। उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ डेब्यू कैप मिलने की उम्मीद है। टीम में चयन के बाद आकाश दीप ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की…

पिता के निधन के बाद 6 महीने में भाई को भी खोया
बिहार के छोटे से गांव से टीम इंडिया तक पहुंचने वाले आकाश दीप का सफर आसान नहीं था। उन्होंने 16 साल की उम्र में पिता को खोया। उसके 6 महीने के अंदर भाई का भी निधन हो गया।

पिता और भाई को खोने के बाद आकाश बहन के साथ दिल्ली चले गए और अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत की। फिर बंगाल में क्लब क्रिकेट खेला। बाद में घरेलू क्रिकेट में बंगाल का प्रतिनिधित्व भी किया। क्रिकेट में करियर बनाने के लिए आकाश को न केवल अपने परिवार को छोड़ना पड़ा, बल्कि स्टेट भी छोड़ना। बिहार क्रिकेट एसोसिएशन पर बैन की वजह से उन्हें बंगाल जाना पड़ा।

भास्कर के सवाल पर आकाश दीप के जवाब…

सवाल: बिहार के सासाराम से निकलकर भारतीय टीम तक पहुंचना बड़ी बात है। इस सफर में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
जवाब:
उस समय हमारे यहां क्रिकेट था ही नहीं। वहां न तो मैदान था और न ही टर्फ विकेट। रेड बॉल तो हमने देखी ही नहीं थी। पापा की बीमारी के कारण हम बाहर नहीं जा पाते थे। पापा के निधन के 6 महीने बाद भैया भी चले गए। पापा और भइया की डेथ के बाद बड़ी बहन घर आई थी। वह मुझे अपने साथ दिल्ली ले गई। वहां उदासी से बचने के लिए क्रिकेट खेलने लगा। दो-तीन महीने प्रैक्टिस के बाद बारिश का मौसम आ गया। ऐसे में एक दोस्त के बुलाने पर मैं डिवीजन के ट्रायल देने के लिए बंगाल चला गया।

वहां यूनाइटेड क्लब के कोच ने मुझे एक मैच में मौका दिया। प्रदर्शन के बाद अंडर-23 टीम में नाम भी आया, लेकिन इंजरी के कारण उस साल मैं मैच नहीं खेल सका। इसके बाद भी मुझे टीम के साथ रखा गया और बेंगलुरु में मैंने रिहैब किया। इलाज के बाद मैं प्रदर्शन करता रहा और मौके मिलते रहे।

सवाल: खुद को मोटिवेट कैसे करते थे?
जवाब:
मेरे पास खोने के लिए कुछ भी नहीं था। मैं अपने पिता और भाई को पहले ही खो चुका था। घर की हालत भी खराब थी। ऐसे में पाने के लिए सब कुछ था, खोने के लिए कुछ भी नहीं। इसी मोटिवेशन के साथ मेहनत करता रहा।

सवाल: साउथ अफ्रीका दौरे के लिए वनडे टीम में आपका नाम था, लेकिन डेब्यू कैप नहीं मिली। अब क्या उम्मीद करते हैं?
जवाब:
3-4 साल से IPL टीम का हिस्सा हूं। हर ड्रेसिंग रूम से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है कि प्रेशर कैसे हैंडल करना है। मुझे डेब्यू कैप की उम्मीद है। अगर टीम मैनेजमेंट मुझे मैच खिलाने का फैसला करता है, तो मैं जो करते आया हूं, वही करूंगा। मेरा पूरा प्रयास करेगा कि टीम के लिए परफॉर्म करूं।

सवाल: इंग्लैंड के बैटिंग ऑर्डर में किसे बड़ी चुनौती मानते हैं और किसका विकेट लेना चाहेंगे?
जवाब:
किसी खास बल्लेबाज का विकेट लेने का मेरा कोई सपना नहीं है। टीम की जीत में कंट्रीब्यूट करना चाहता हूं। मुझे संतुष्टि तभी मिलेगी, जब मैं टीम की जीत में कंट्रीब्यूट करूंगा। विकेट लेने के बाद यदि जीत में मेरा कंट्रीब्यूशन नहीं है, तो उस विकेट का कोई मतलब नहीं है। मेरा जो भी रोल तय होगा। उसे अच्छे से निभाने की कोशिश करूंगा।

सवाल: RCB की ओर से आपने अल्जारी जोसेफ और लोकी फर्ग्यूसन जैसे गेंदबाजों के साथ बॉलिंग की है। उसका कितना फायदा मिलेगा?
जवाब:
एक तेज गेंदबाज के तौर पर आप सबसे सीखते हो, लेकिन आपको अपना गेम पता होना चाहिए। अल्जारी जोसेफ अलग बॉलर हैं और लॉकी फर्ग्यूसन अलग बॉलर हैं। ऐसे में हमें पता होना चाहिए कि हम अपने आप को कितना बेहतर बना सकते हैं। हम किसी के माइंडसेट के बारे में बात कर सकते हैं, लेकिन हमें पता होना चाहिए कि हमारी स्ट्रेंथ क्या है। ये आप पर ही निर्भर करता है कि आप कितना बेहतर करते हो।

सवाल: बुमराह-सिराज के साथ गेंदबाजी करेंगे। ऐसे में आपकी गेंदबाजी की क्या रणनीति होगी। क्या कोई दबाव है?
जवाब:
हां, थोड़ा दबाव हो सकता है। प्रेशर से गेम में निखार आता है। हालांकि अभी ऐसा कुछ भी नहीं है। मैं इतने दिन से क्रिकेट खेलता आ रहा हूं, तो जो मैं करता आया हूं, वही करूंगा। जो मेरी स्ट्रेंथ है, आगे भी वही करूंगा।

सवाल: अपना आइडियल किसे मानते हैं।
जवाब :
सचिन तेंदुलकर।

सवाल: आपकी गेंदबाजी को निखारने में सौराशीष सर का कितना योगदान है?
जवाब:
सर का अहम योगदान रहा। मेरे जैसे बहुत से प्लेयर्स इंडिया में होंगे, लेकिन उन्हें मौका नहीं मिल पा रहा है। यही मौका सौराशीष लाहिरी सर ने मुझे दिया। इससे बड़ा योगदान और क्या हो सकता है जिंदगी में। वे हमें एक ट्रैक पर लाए थे, जैसे ट्रेन को पटरी पर लाया जाता है।

सवाल: आप पिछले 5-6 साल से गांव में क्रिकेट प्रतियोगिता करा रहे है। टूर्नामेंट कराने का ख्याल कैसे आया?
जवाब:
मुझे समय पर मौका नहीं मिला। ऐसे में मैं चाहता हूं कि हमारे यहां की प्रतिभाओं को पूरा अवसर मिले। यदि ऐसा हो जाता है तो मेरे लिए संतुष्टि की बात होगी। मैं ऐसे बच्चों की मदद करना चाहता हूं, जो आर्थिक परेशानियों के कारण बाहर नहीं जा पाते हैं। यदि मेरे टूर्नामेंट से उन्हें आगे मौका मिलता है, तो मेरे लिए बड़ी बात होगी।

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