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‘Operation Valentine’ is based on a true incident. | सच्ची घटना पर आधारित है ‘ऑपरेशन वेलेंटाइन’: वरुण बोले- स्क्रिप्ट पढ़कर बहुत गर्व महसूस हुआ, फिल्म से काफी इंस्पिरेशन मिला

  • February 18, 2024

1 घंटे पहले

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मानुषी छिल्लर और वरुण तेज अपनी अपकमिंग फिल्म ‘ऑपरेशन वेलेंटाइन’ को लेकर चर्चा में हैं। ये फिल्म पुलवामा अटैक पर आधारित है। फिल्म की कहानी भारत के सबसे बड़े एयरस्ट्राइक पर बेस्ड होगी। रिपोर्ट्स की मानें तो, पुलवामा में वेलेंटाइन्स डे के दिन, सैनिकों पर हुए आत्मघाती हमले का बदला लेने के लिए भारतीय एयरफोर्स ने पाकिस्तान में घुसकर एयरस्ट्राइक किया था।

‘ऑपरेशन वैलेंटाइन’ का डायरेक्शन शक्ति प्रताप सिंह हाड़ा ने किया है। फिल्म ‘ऑपरेशन वेलेंटाइन’ में वरुण तेज ने अर्जुन देव की भूमिका निभाई है। वहीं, मानुषी छिल्लर एक रडार ऑफिसर के किरदार में नजर आएंगी। इस फिल्म से शक्ति प्रताप सिंह हाड़ा बतौर डायरेक्टर डेब्यू कर रहे हैं। फिल्म दो भाषा हिंदी और तेलुगु में 1 मार्च को रिलीज की जाएगी। हाल ही इस फिल्म की कास्ट ने दैनिक भास्कर से एक्सक्लूसिव बातचीत की। पेश हैं बातचीत के कुछ प्रमुख अंश :

खबरों की मानें तो पहले फिल्म 16 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली थी, अब 1 मार्च को रिलीज होगी।

खबरों की मानें तो पहले फिल्म 16 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली थी, अब 1 मार्च को रिलीज होगी।

सवाल- ‘ऑपरेशन वेलेंटाइन’ की स्क्रिप्ट पढ़कर कैसा लगा?
वरुण का जवाब- मुझे स्क्रिप्ट पढ़कर बहुत गर्व महसूस हुआ। ये फिल्म ‘पुलवामा अटैक’ के इंसिडेंट पर आधारित है। हालांकि मुझे पहले से इस घटना के बारे में पता जरूर था, लेकिन स्क्रिप्ट पढ़कर और भी बारीकियों का पता चला। फिल्म की कहानी में एयरफोर्स पायलट की जिंदगी के पहलुओं को भी दिखाया गया है।

जब मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी, मुझे काफी इंस्पिरेशन मिला। वो लोग कितने सेल्फलेस होते हैं। जैसे अगर मैं अपनी बात करूं, मैं खुद के, अपनी फैमिली के, अपने परिवार के बारे में सोचता हूं। लेकिन वहीं एक सोल्जर पूरे देश को अपनी फैमिली मानते हैं। वो खुद के लिए नहीं बल्कि लोगों के लिए जीते हैं। इसलिए वे बॉर्डर पर हमारी रक्षा करने के लिए तैनात रहते हैं, और समय आने पर लड़ते भी हैं।

सवाल- फिल्म की लीड एक्ट्रेस मानुषी छिल्लर हैं। ऐसे में उनसे पूछा गया कि आप अपने किरदार के बारे में कुछ बताइए।
मानुषी का जवाब- मेरा रोल एक रडार कंट्रोलर का है। रडार कंट्रोलर हमारे फाइटर पायलट को गाइड करते हैं। फिल्म में मेरा और वरुण का एक पर्सनल रिश्ता भी दिखाया गया है। इसलिए हम दोनों घर की बात अलग और काम की बात अलग रखते हैं। मैं अपने रोल को वायस ऑफ रीजन कहना चाहूंगी। यानी कि ऐसा व्यक्ति जो दूसरों को समझदारी से कार्य करने के लिए प्रभावित करता है। मैंने जब पहली बार स्क्रिप्ट पढ़ी, तो फिल्म में अपना किरदार काफी प्रैक्टिकल लगा।

मिस वर्ल्ड (2017), फेमिना मिस इंडिया (2017) के अलावा मानुषी ने मिस फोटोजेनिक का अवॉर्ड भी जीता है। वे मिस हरियाणा भी रह चुकी हैं।

मिस वर्ल्ड (2017), फेमिना मिस इंडिया (2017) के अलावा मानुषी ने मिस फोटोजेनिक का अवॉर्ड भी जीता है। वे मिस हरियाणा भी रह चुकी हैं।

मैंने फिल्म में ‘आहना गिल’ का किरदार निभाया है। मेरा मानना है कि हम सब फीमेल में ‘आहना गिल’ की क्वालिटी होती हैं। इसलिए मैंने इस किरदार से बहुत रिलेट किया। आहना चीजों को लेकर बहुत क्लीयर है- वो अपना लक्ष्य जानती है। आहना अच्छी तरह जानती है कि उसे लक्ष्य को कैसे पाना है, भले ही उसे अपने पर्सनल रिश्ते अलग क्यों न करने पड़ें। मेरे लिए ये मायने नहीं रखता कि फिल्म में मेरा रोल कितना है, या दूसरे का रोल कितना है। मैं फिल्म की स्टोरी को ज्यादा महत्व देती हूं। हम ये अच्छी तरह समझते हैं कि एक मिशन को पूरा करने में किसी एक का नहीं, बल्कि कई लोगों का हाथ होता है। हमारे आर्म्ड फोर्स में भी बहुत सारी फीमेल होती हैं, जिनका योगदान बहुत अहम होता है। हम लोगों ने फिल्म के जरिए इन सारे पहलुओं को दिखाने की कोशिश की है।

वहीं वरुण का कहना था भले ही आप ढाई घंटे की फिल्म में 25 मिनट के लिए ही क्यों ना हों, बस आपका किरदार दमदार होना चाहिए।

सवाल- फिल्म में वरुण ‘कैप्टन अभिनंदन’ से प्रेरित किरदार निभा रहे हैं। अपने रोल के बारे में कुछ बताइए।
वरुण का जवाब- मैंने अपने किरदार में असल कैप्टन अभिनंदन को मिमिक नहीं किया है। मुझे ऐसा लगता है जिन्होंने हमारे देश के लिए इतना कुछ किया उनकी मिमिक्री करना सही नहीं है।
हम लोगों ने फिल्म में पुलवामा अटैक के इंसिडेंट को दिखाया है। फिल्म के कैरेक्टर्स फिक्शनल हैं। हां, हम लोग रियल फाइटर जेट पायलट से इंस्पायर्ड जरूर हुए हैं।

साउथ एक्टर वरुण तेज, चिरंजीवी, राम चरण, अल्लू अर्जुन जैसे दिग्गजों के फिल्मी परिवार से आते हैं।

साउथ एक्टर वरुण तेज, चिरंजीवी, राम चरण, अल्लू अर्जुन जैसे दिग्गजों के फिल्मी परिवार से आते हैं।

सवाल- इस तरह की देशभक्ति वाली फिल्म करने में आपको कैसा महसूस हुआ?
मानुषी का जवाब- बचपन से हम इस देशभक्ति के एहसास से बड़े हुए हैं। देश के लिए प्यार हम सबके अंदर भरा हुआ है। ये समझना बहुत जरूरी है कि एक देश की रक्षा करने के लिए एक नहीं बल्कि बहुत लोगों का योगदान होता है। मुझे अभी भी याद है जब मैं मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता के लिए जा रही थी, उस दौरान मुझसे कहा गया था कि प्रतियोगिता में 120 देशों की लड़कियां होंगी। वहां आपको आपके नाम से नहीं बुलाएंगे। बल्कि आपको आपके देश के नाम से बुलाएंगे। इसलिए मेरा नाम एक महीने के लिए ‘इंडिया’ था।

मुझसे ये भी कहा गया था कि आप जो भी करोगे, लोग उससे इंडियंस के बारे में धारणा बना लेंगे। कमाल की बात है जब मैं जीत कर वापस आई, और लोगों को खुशियां मनाते देखा, तब लगा कि ये अकेली मेरी जीत नहीं बल्कि पूरे देश की जीत है। इसी तरह जब आप ऐसी फिल्में करते हैं, जो देश के हीरोज पर आधारित हैं, बहुत गर्व महसूस करते हैं। बतौर ऐक्टर्स हमें ऑडियंस को एंटरटेन करना होता है और इस तरह के रोल जिम्मेदारी से निभाना भी होता है।

सवाल- इस बारे में आप क्या कहना चाहेंगे।
वरुण का जवाब- मैं हाल ही में मानव विकास के बारे में एक किताब पढ़ रहा था। उस किताब में था कि किस तरह से हम सब एक छत के नीचे आकर (एक-साथ) आगे बढ़ते हैं। ये कम्यूनल फीलिंग गजब की होती है। इससे हमें एहसास होता है कि ये वो फीलिंग है, जो हम सबको एक साथ लेकर चलती है। अगर हम जाति, धर्म को किनारे रख कर मानवता के बारे में सोचें तो साथ की भावना को बेहतर समझ सकेंगे।

सवाल- ‘कैप्टन अभिनंदन’ से प्रेरित किरदार निभाने के लिए आपने अपनी बॉडी को कैसे तैयार किया?
वरुण का जवाब- मैंने 6 महीनों तक लगातार जिम की। मैंने खाने में चीनी और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बहुत कम कर दी। इस फिल्म से पहले मैं जो प्रोजेक्ट कर रहा था, उसके लिए मैंने अपना काफी वजन बढ़ा लिया था। मैं उसमें एक बॉक्सर का रोल निभा रहा था। इस फिल्म के लिए मुझे बॉक्सर जैसा नहीं दिखना था। इसलिए मुझे खुद की बॉडी पर अच्छा-खासा काम करना पड़ा।

सवाल- मानुषी, आप फिल्म में रडार कंट्रोलर का रोल निभा रही हैं, आपने तैयारी कैसे की?
मानुषी का जवाब- इस फिल्म के दौरान मैं एक और फिल्म का शूट कर रही थी, जिसमें मेरे एक्शन सीक्वन्स थे। ऐसे में ‘ऑपरेशन वेलेंटाइन’ फिल्म के लिए मुझे वजन बढ़ाना पड़ा। वरुण ने मेरी काफी मदद की। उन्होंने मुझे डाइट के लिए सही तरह से गाइड किया।

वरुण तेज और मिस उत्तराखंड लावण्या त्रिपाठी ने 1 नवंबर को इटली में शादी की थी।

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सवाल- आपकी आने वाली फिल्म ‘ऑपरेशन वेलेंटाइन’ हाल ही में रिलीज हुई ‘तेजस’ और ‘फाइटर’ से कैसे अलग है?
वरुण का जवाब- माना कि हमारी फिल्म की भी एयरफोर्स और डिफेंस लाइन ही है, लेकिन ये फिल्म उन दोनों फिल्मों से काफी अलग है। सच कहूं तो अपने बिजी रूटीन की वजह से मैं ‘फाइटर’ देख भी नहीं पाया। इतना कहूंगा कि ‘ऑपरेशन वेलेंटाइन’ में हमारा अप्रोच बहुत रियलिस्टिक है। हम कुछ काल्पनिक नहीं बल्कि गहराई दिखाना चाहते हैं।

साल 2002 में ‘भगत सिंह’ के नाम से कई फिल्में आई थीं। लेकिन हर फिल्म एक-दूसरे से जुदा थी। इस फिल्म में हम लोगों ने एयरफोर्स पायलट की निजी जिंदगी के किस्से भी दिखाए हैं। मुझे लगता है लोगों के लिए ये बिल्कुल नया एक्सपीरियंस होगा। वहीं मानुषी ने कहा ये तीनों अलग-अलग तरह की फिल्में हैं। इन्हें कम्पेयर नहीं करना चाहिए।

सवाल- मानुषी, आपने तेलुगु सिनेमा में भी काम किया है। ऐसे में आप साउथ इंडस्ट्री का एक्सपीरियंस बताइए।
मानुषी का जवाब- मैंने साउथ के खाने को काफी एंजॉय किया। हालांकि तेलुगु सीखने की काफी कोशिश की है। थोड़ी-बहुत तेलुगु समझने जरूर लगी हूं। लेकिन पूरी तरह से तेलुगु भाषा सीखने में समय लगेगा। सेट पर लोग थे, जो हमें डायलॉग बोलना सिखा देते थे। मैं तेलुगु लाइन याद करके ही सेट पर जाती थी। मैंने तेलुगु के डायलॉग्स भी बोले हैं।

वहीं वरुण ने कहा नई भाषा सीखना मुश्किल है। मैंने हमेशा से तेलुगु बोली है। हां, इंग्लिश मुझे जरूर आती है। लेकिन हिंदी मैं समझता पूरा हूं बस ठीक से बोल नहीं पाता। मैं मलयालम और कन्नड़ भाषा भी समझ सकता हूं। मुझे लगता है फिल्म इंडस्ट्री की ये बहुत अच्छी बात है कि हमें अलग-अलग भाषाओं की फिल्में करने का मौका मिलता है।

सवाल- साउथ इंडस्ट्री के बारे में एक पॉजिटिव और नेगेटिव बात बताइए।
मानुषी का जवाब- हालांकि मैंने साउथ इंडस्ट्री की एक ही फिल्म की है, ऐसे में सबसे अच्छी बात मुझे वहां का डिसप्लिन लगा। सबकी टाइमिंग बिल्कुल फिक्स रहती थी, और लोग टाइमिंग फॉलो भी करते थे। वहां के लोग टाइम को लेकर बेहद पंक्चुअल थे। मुझे बहुत अच्छा लगता था कि हम टाइम से शुरू, टाइम पर खत्म और बीच में 1 घंटे का ब्रेक लिया करते थे। रविवार को मेरी छुट्टी रहा करती थी। इस तरह के रूटीन से मुझे मेरे बचपन की याद आ गई। एक चीज जो मैं बदलना चाहूंगी वो बस भाषा की वजह से कम्युनिकेशन गैप कहूंगी।

वहीं वरुण ने कहा कि मुझे ऐसा लगता है कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में सेट पर काफी महिलाएं काम करती हैं। लेकिन साउथ में अभी ऐसा नहीं है। वहां सेट पर कम फीमेल वर्कर्स ही देखने को मिलती हैं। हालांकि अब ये ट्रेंड चेंज होता नजर आ रहा है।

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