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Under-19 World Cup Top Scorer: Uday Saharan Sachin Dhas | Musheer Khan | पिता का अधूरा सपना पूरा कर रहे 2 भारतीय क्रिकेटर: उदय अंडर-19 वर्ल्डकप के टॉप-स्कोरर, सचिन शतक जमा चुके

स्पोर्ट्स डेस्क54 मिनट पहलेलेखक: राजकिशोर

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जिद…लगन और कड़ी मेहनत से कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है, फिर चाहे उसे देखने वाला कोई भी हो। यह बात अंडर-19 वर्ल्ड कप खेल रही भारतीय टीम के कप्तान उदय सहारन और सचिन धास ने साबित की है। दोनों ने मेजबान साउथ अफ्रीका के खिलाफ 171 रन की पार्टनरशिप कर भारत को फाइनल में प्रवेश कराया। इनके पिता ने इंटरनेशनल क्रिकेटर बनने का सपना देखा, जिसे उदय और सचिन पूरा कर रहे हैं।

ये दोनों क्रिकेटर अंडर-19 वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंच चुकी भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा हैं और अपने दमदार प्रदर्शन से दुनिया में नाम कमा रहे हैं। फाइनल मुकाबला 11 फरवरी को ऑस्ट्रेलिया से होगा।

उदय और सचिन के पिता इंटरनेशनल क्रिकेटर बनना चाहते थे, लेकिन अलग-अलग लेवल पर डोमेस्टिक क्रिकेट खेलकर मन मार लिया और ठाना कि अपने बेटों को इंटरनेशनल क्रिकेटर ही बनाएंगे।’

उदय के पिता संजीव सहारन स्टेट लेवल प्लेयर रहे हैं, जबकि सचिन धास के पिता संजय धास यूनिवर्सिटी लेवल के क्रिकेटर रहे हैं। आगे एक-एक करके दोनों की सफलता की कहानी, उनके पिता की जुबानी…

1. उदय के पिता- रणजी टीम में नाम आया, लेकिन पता नहीं चला…तभी ठाना
भारतीय कप्तान उदय सहारन के पिता संजीव सहारन स्टेट लेवल क्रिकेटर रहे हैं। वे उदयपुर क्रिकेट एसोसिएशन की ओर से खेलते थे। संजीव उदयपुर के लिए दो बार राजस्थान के दयानंद धनकड़ टूर्नामेंट (रणजी ट्रॉफी से पहले आयोजित होना वाला टूर्नामेंट, जैसे आज चैलेंजर ट्रॉफी होती है) में हिस्सा ले चुके हैं।

संजीव बताते हैं कि एक बार मेरा नाम भी रणजी के लिए आया, पर दुर्भाग्य से मुझे पता नहीं चल पाया और मैं जा नहीं पाया। मैं खेलने से चूक गया। फिर मैंने क्रिकेट अकादमी खोली। मैंने सोचा कि मेरा बच्चा खेले और मेरा सपना पूरा करे। जब उदय 2-3 साल का हुआ, तो मैं उसे अपने साथ अकादमी ले जाने लगा। इस पर रिश्तेदार हमेशा ताना मारते थे कि अपना करियर बर्बाद कर लिया, अब बेटे का बर्बाद करने पर लगा है।

  • कोहली को देखकर उदय ने गोल-गप्पे और चाट खाना छोड़ा संजीव ने बताया कि उदय विराट कोहली को आदर्श मानते हैं। वे उन्हें फॉलो भी करते हैं। उसे विराट का एटीट्यूड और खेलने का तरीका काफी पसंद है। वह बचपन में गोल गप्पे और चाट खूब खाता था। फिर विराट को फॉलो करते हुए ये सब छोड़ दिया।
  • उदय अच्छा लर्नर है, जल्दी सीख लेता है संजीव कहते हैं कि मेरे लिए सभी बच्चे एक जैसे हैं, लेकिन उदय में खासियत है कि वह बहुत अच्छा लर्नर है। एक बार जो टेक्नीक बता दो। उसे जल्दी सीख लेता है और प्रैक्टिस में लग जाता है।
  • रात 11 बजे वेस्टइंडीज से लौटे और सुबह 6 बजे प्रैक्टिस वे उदय का हार्डवर्क बताते हुए कहते हैं कि 2022 में उदय स्टैंड बाय था। तब भी उसका प्रदर्शन अच्छा था, लेकिन मौका नहीं मिला। उदय वेस्टइंडीज से लौटकर रात 11 बजे घर पहुंचा और अगले दिन सुबह 6 बजे प्रैक्टिस करने पहुंच गया। मैंने आराम करने काे कहा तो बोला, ‘पापा अगर मुझे वर्ल्ड कप खेलना है तो और ज्यादा मेहनत करनी होगी।’ उस दिन से वह 12 से 14 घंटे प्रैक्टिस करने लगा।

2. सचिन के पिता- जन्म से पहले तय कर लिया था कि बेटे को क्रिकेटर ही बनाऊंगा
सचिन धास के पिता संजय धास नेशनल लेवल कबड्‌डी प्लेयर हैं, वे खुद क्रिकेटर बनना चाहते थे, लेकिन डिस्ट्रिक्ट और यूनिवर्सिटी लेवल तक ही क्रिकेट खेल सके। वे सचिन तेंदुलकर और सुनील गावस्कर के बड़े फैन हैं। उन्होंने तेंदुलकर के नाम पर बेटे का नाम सचिन रखा। संजय बताते हैं कि मैंने बच्चे के जन्म से पहले ही तय कर लिया था कि बेटे को क्रिकेटर ही बनाऊंगा और उसका नाम सचिन रखूंगा।

सचिन की मां भी कबड्‌डी प्लेयर हैं और पुलिस विभाग में हैं। सचिन पढ़ाई में भी अच्छे थे। इस पर उनकी मां ने संजय से कहा कि वह पढ़ाई में ये अच्छा है, आपको अपने फैसले पर फिर से सोचना चाहिए। क्रिकेट में ज्यादा फ्यूचर नहीं है और पढ़ेगा, तो भविष्य सुधर जाएगा। तब संजय ने अपनी जिद दोहराई और कहा- ‘इकलौता लड़का है। इसे क्रिकेटर ही बनाऊंगा और इसका अच्छा और बुरा दोनों के लिए मैं जिम्मेदार रहूंगा।’ 3 पॉइंट्स में सचिन की सफलता-

  • पिता ने गांव के स्कूल ग्राउंड पर 4 टर्फ बनवाए बेटे को टर्फ विकेट पर ट्रेनिंग देने के लिए अपने गांव भिड के स्कूल ग्राउंड पर जिला अधिकारी से परमिशन लेकर चार टर्फ विकेट बनवाए। संजय बताते हैं कि भिड में क्रिकेट का इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं है। जब सचिन पहली बार महाराष्ट्र अंडर-14 के लिए चुना गया, तो वहां टर्फ विकेट पर खेला। उसका चयन स्टेट टीम में हुआ। वहां से लौटने पर कई कोच ने कहा कि इसे आप टर्फ पर खिलाओ। मैट पर खेलने से इसका खेल खराब हो जाएगा। उसके बाद मैंने बीड क्रिकेट एसोसिएशन के अधिकारियों से बातचीत की।
  • सचिन यूट्यूब में आज भी तेंदुलकर की बैटिंग देखते हैं संजय बताते हैं कि वे तेंदुलकर सर, विराट और एबी डीविलियर्स को अपना आदर्श मानते हैं। तेंदुलकर के लिए तो वो पागल हैं। अभी भी यूट्यूब पर तेंदुलकर के पुराने मैचों के वीडियो देखता है। उसे तेंदुलकर का नेचर बहुत पसंद है। सचिन की तरह शांत रहना उसको अच्छा लगता है। उसे विराट कोहली का मैदान पर एग्रेशन और मैच को खींचकर अंत तक लेना जाना पसंद है। जबकि एबी डीविलयर्स के बड़े शॉट और छक्के पसंद हैं।
  • प्रैक्टिस के लिए हमेशा तैयार रहता है सचिन जब 4 साल का था, मैं तब से उसे ग्राउंड पर ले जाता था। बाद में वह अपने से बड़े बच्चों के साथ खेलने लगा। उसका क्रिकेट के प्रति जुनून था। कभी उसने प्रैक्टिस में जाने के लिए मना नहीं किया। सुबह उठकर जाता था। आज तक भी उसने कभी ये नहीं कहा कि फिटनेस नहीं करूंगा। जब वह प्राइमरी में था, तब उसका स्कूल सुबह का था। उस समय दोपहर में प्रैक्टिस सेशन जॉइन करता था। कभी-कभी आदर्श सर दोपहर 12:00-01:00 बजे आकर घर से ही लेकर जाते थे। एक बार सर बैडमिंटन खेलते हुए गिर गए और उनका हाथ टूट गया। इसके बावजूद वे सचिन को प्रैक्टिस कराने के लिए आते थे।

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